श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.55

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

प्रियव्रतोत्तानपादौ तिस्रः कन्याश्‍च भारत।

आकूतिर्देवहूतिश्‍च प्रसूतिरिति सत्तम॥ ५५

priyavratottānapādau tisraḥ kanyāśca bhārata|

ākūtirdevahūtiśca prasūtiriti sattama|| 55

अर्थ

साधुशिरोमणि विदुरजी! उनमें प्रियव्रत और उत्तानपाद दो पुत्र थे तथा आकूति, देवहूति और प्रसूति—तीन कन्याएँ थीं॥ ५५॥

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