जब ब्रह्माजीने देखा कि मेरी आज्ञा न मानकर ये मेरे पुत्र मेरा तिरस्कार कर रहे हैं, तब उन्हें असह्य क्रोध हुआ। उन्होंने उसे रोकनेका प्रयत्न किया॥ ६॥✎ 1590
सोऽवध्यातः सुतैरेवं प्रत्याख्यातानुशासनैः।
क्रोधं दुर्विषहं जातं नियन्तुमुपचक्रमे॥ ६
जब ब्रह्माजीने देखा कि मेरी आज्ञा न मानकर ये मेरे पुत्र मेरा तिरस्कार कर रहे हैं, तब उन्हें असह्य क्रोध हुआ। उन्होंने उसे रोकनेका प्रयत्न किया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 287) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)