किंतु बुद्धिद्वारा उनके बहुत रोकनेपर भी वह क्रोध तत्काल प्रजापतिकी भौंहोंके बीचमेंसे एक नीललोहित (नीले और लाल रंगके) बालकके रूपमें प्रकट हो गया॥ ७॥✎ 1590
धिया निगृह्यमाणोऽपि भ्रुवोर्मध्यात्प्रजापतेः।
सद्योऽजायत तन्मन्युः कुमारो नीललोहितः॥ ७
किंतु बुद्धिद्वारा उनके बहुत रोकनेपर भी वह क्रोध तत्काल प्रजापतिकी भौंहोंके बीचमेंसे एक नीललोहित (नीले और लाल रंगके) बालकके रूपमें प्रकट हो गया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 287) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/7/