श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.46

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इत्युपस्थीयमानस्तैर्मुनिभिर्ब्रह्मवादिभिः।

सलिले स्वखुराक्रान्त उपाधत्तावितावनिम्॥ ४६

ityupasthīyamānastairmunibhirbrahmavādibhiḥ|

salile svakhurākrānta upādhattāvitāvanim|| 46

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! उन ब्रह्मवादी मुनियोंके इस प्रकार स्तुति करनेपर सबकी रक्षा करनेवाले वराहभगवान्‌ने अपने खुरोंसे जलको स्तम्भित-कर उसपर पृथ्वीको स्थापित कर दिया॥ ४६॥✎ 256

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #256 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् ने → वराहभगवान्‌ने

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