तो भी तुम्हारी इस सन्तान-प्राप्तिकी इच्छाको मैं यथाशक्ति अवश्य पूर्ण करूँगा। परन्तु अभी तुम एक मुहूर्त ठहरो, जिससे लोग मेरी निन्दा न करें॥ २१॥
अथापि काममेतं ते प्रजात्यै करवाण्यलम्।
यथा मां नातिवोचन्ति मुहूर्तं प्रतिपालय॥ २१
तो भी तुम्हारी इस सन्तान-प्राप्तिकी इच्छाको मैं यथाशक्ति अवश्य पूर्ण करूँगा। परन्तु अभी तुम एक मुहूर्त ठहरो, जिससे लोग मेरी निन्दा न करें॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 300) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/14/21/