साध्वि! इस सन्ध्याकालमें भूतभावन भूतपति भगवान् शंकर अपने गण भूत-प्रेतादिको साथ लिये बैलपर चढ़कर विचरा करते हैं॥ २३॥
एतस्यां साध्वि सन्ध्यायां भगवान् भूतभावनः।
परीतो भूतपर्षद्भिर्वृषेणाटति भूतराट्॥ २३
साध्वि! इस सन्ध्याकालमें भूतभावन भूतपति भगवान् शंकर अपने गण भूत-प्रेतादिको साथ लिये बैलपर चढ़कर विचरा करते हैं॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 301) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/14/23/