श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.35

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

स नः प्रसीदतां भामो भगवानुर्वनुग्रहः।

व्याधस्याप्यनुकम्प्यानां स्त्रीणां देवः सतीपतिः॥ ३५

sa naḥ prasīdatāṃ bhāmo bhagavānurvanugrahaḥ|

vyādhasyāpyanukampyānāṃ strīṇāṃ devaḥ satīpatiḥ|| 35

अर्थ

हम स्त्रियोंपर तो व्याध भी दया करते हैं, फिर वे सतीपति तो मेरे बहनोई और परम कृपालु हैं; अतः वे मुझपर प्रसन्‍न हों॥ ३५॥✎ 259

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #259 शब्दोंके बीचका स्थान: भूतोंकेस्वामी → भूतोंके स्वामी

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