श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.36

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

स्वसर्गस्याशिषं लोक्यामाशासानां प्रवेपतीम्।

निवृत्तसन्ध्यानियमो भार्यामाह प्रजापतिः॥ ३६

svasargasyāśiṣaṃ lokyāmāśāsānāṃ pravepatīm|

nivṛttasandhyāniyamo bhāryāmāha prajāpatiḥ|| 36

अर्थ

श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! प्रजापति कश्यपने सायंकालीन सन्ध्या-वन्दनादि कर्मसे निवृत्त होनेपर देखा कि दिति थर-थर काँपती हुई अपनी सन्तानकी लौकिक और पारलौकिक उन्‍नतिके लिये प्रार्थना कर रही है। तब उन्होंने उससे कहा॥ ३६॥

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