श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.16.14

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

सतीं व्यादाय शृण्वन्तो लघ्वीं गुर्वर्थगह्वराम्।

विगाह्यागाधगम्भीरां न विदुस्तच्चिकीर्षितम्॥ १४

satīṃ vyādāya śṛṇvanto laghvīṃ gurvarthagahvarām|

vigāhyāgādhagambhīrāṃ na vidustaccikīrṣitam|| 14

अर्थ

भगवान्‌की उक्ति बड़ी ही मनोहर और थोड़े अक्षरोंवाली थी; किन्तु वह इतनी अर्थपूर्ण, सारयुक्त, दुर्विज्ञेय और गम्भीर थी कि बहुत ध्यान देकर सुनने और विचार करनेपर भी वे यह न जान सके कि भगवान् क्या करना चाहते हैं॥ १४॥✎ 267

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #267 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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