उन दोनों असुरोंके तेजसे ही तुम सबका तेज फीका पड़ गया है। इस समय भगवान् ऐसा ही करना चाहते हैं॥ ३६॥
तयोरसुरयोरद्य तेजसा यमयोर्हि वः।
आक्षिप्तं तेज एतर्हि भगवांस्तद्विधित्सति॥ ३६
उन दोनों असुरोंके तेजसे ही तुम सबका तेज फीका पड़ गया है। इस समय भगवान् ऐसा ही करना चाहते हैं॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 317) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/16/36/