श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.16.35

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तावेव ह्यधुना प्राप्तौ पार्षदप्रवरौ हरेः।

दितेर्जठरनिर्विष्टं काश्यपं तेज उल्बणम्॥ ३५

tāveva hyadhunā prāptau pārṣadapravarau hareḥ|

diterjaṭharanirviṣṭaṃ kāśyapaṃ teja ulbaṇam|| 35

अर्थ

इस समय दितिके गर्भमें स्थित जो कश्यपजीका उग्र तेज है, उसमें भगवान्‌के उन पार्षदप्रवरोंने ही प्रवेश किया है॥ ३५॥

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