॥ श्रीहरिः ॥
तदा विकुण्ठधिषणात्तयोर्निपतमानयोः।
हाहाकारो महानासीद्विमानाग्र्येषु पुत्रकाः॥ ३४
tadā vikuṇṭhadhiṣaṇāttayornipatamānayoḥ|
hāhākāro mahānāsīdvimānāgryeṣu putrakāḥ|| 34
अर्थ
पुत्रो! फिर जब वे वैकुण्ठलोकसे गिरने लगे, तब वहाँ श्रेष्ठ विमानोंपर बैठे हुए वैकुण्ठवासियोंमें महान् हाहाकार मच गया॥ ३४॥
तदा विकुण्ठधिषणात्तयोर्निपतमानयोः।
हाहाकारो महानासीद्विमानाग्र्येषु पुत्रकाः॥ ३४
पुत्रो! फिर जब वे वैकुण्ठलोकसे गिरने लगे, तब वहाँ श्रेष्ठ विमानोंपर बैठे हुए वैकुण्ठवासियोंमें महान् हाहाकार मच गया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 317) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/16/34/