श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.18.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

पुनर्गदां स्वामादाय भ्रामयन्तमभीक्ष्णशः।

अभ्यधावद्धरिः क्रुद्धः संरम्भाद्दष्टदच्छदम्॥ १६

punargadāṃ svāmādāya bhrāmayantamabhīkṣṇaśaḥ|

abhyadhāvaddhariḥ kruddhaḥ saṃrambhāddaṣṭadacchadam|| 16

अर्थ

फिर जब वह क्रोधसे होठ चबाता अपनी गदा लेकर बार-बार घुमाने लगा, तब श्रीहरि कुपित होकर बड़े वेगसे उसकी ओर झपटे॥ १६॥✎ 279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #279 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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