जब अन्य पवित्रकीर्ति और परम यशस्वी महापुरुषोंका चरित्र सुननेसे ही बड़ा आनन्द होता है, तब श्रीवत्सधारी भगवान्की ललित-ललाम लीलाओंकी तो बात ही क्या है॥ ३४॥✎ 289290
अन्येषां पुण्यश्लोकानामुद्दामयशसां सताम्।
उपश्रुत्य भवेन्मोदः श्रीवत्साङ्कस्य किं पुनः॥ ३४
जब अन्य पवित्रकीर्ति और परम यशस्वी महापुरुषोंका चरित्र सुननेसे ही बड़ा आनन्द होता है, तब श्रीवत्सधारी भगवान्की ललित-ललाम लीलाओंकी तो बात ही क्या है॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 328) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/19/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)