अजन्मा होकर भी वसुदेवजीके यहाँ जन्म लेनेकी लीला करना, सबको अभय देनेवाले होनेपर भी मानो कंसके भयसे व्रजमें जाकर छिप रहना और अनन्तपराक्रमी होनेपर भी कालयवनके सामने मथुरापुरीको छोड़कर भाग जाना—भगवान्की ये लीलाएँ याद आ-आकर मुझे बेचैन कर डालती हैं॥ १६॥✎ 19412971298
मां खेदयत्येतदजस्य जन्म-
विडम्बनं यद्वसुदेवगेहे।
व्रजे च वासोऽरिभयादिव स्वयं
पुराद् व्यवात्सीद्यदनन्तवीर्यः॥ १६
अजन्मा होकर भी वसुदेवजीके यहाँ जन्म लेनेकी लीला करना, सबको अभय देनेवाले होनेपर भी मानो कंसके भयसे व्रजमें जाकर छिप रहना और अनन्तपराक्रमी होनेपर भी कालयवनके सामने मथुरापुरीको छोड़कर भाग जाना—भगवान्की ये लीलाएँ याद आ-आकर मुझे बेचैन कर डालती हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.2.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 243) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/2/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#194 शब्दोंके बीचका स्थान: जाना—भगवान् की → जाना—भगवान्की
#1297 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रकुटिविलाससे → भु्रुकुटिविलाससे
#1298 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रुकुटिविलाससे → भ्रुकुटिविलाससे