जिन्होंने कालरूप अपने भ्रुकुटिविलाससे ही पृथ्वीका सारा भार उतार दिया था, उन श्रीकृष्णके पादपद्मपरागका सेवन करनेवाला ऐसा कौन पुरुष है, जो उसे भूल सके॥ १८॥✎ 19412971298
को वा अमुष्याङ्घ्रिसरोजरेणुं
विस्मर्तुमीशीत पुमान् विजिघ्रन्।
यो विस्फुरद्भ्रूविटपेन भूमे-
र्भारं कृतान्तेन तिरश्चकार॥ १८
जिन्होंने कालरूप अपने भ्रुकुटिविलाससे ही पृथ्वीका सारा भार उतार दिया था, उन श्रीकृष्णके पादपद्मपरागका सेवन करनेवाला ऐसा कौन पुरुष है, जो उसे भूल सके॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.2.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 243) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/2/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#194 शब्दोंके बीचका स्थान: जाना—भगवान् की → जाना—भगवान्की
#1297 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रकुटिविलाससे → भु्रुकुटिविलाससे
#1298 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रुकुटिविलाससे → भ्रुकुटिविलाससे