शिशुपालके ही समान महाभारत-युद्धमें जिन दूसरे योद्धाओंने अपनी आँखोंसे भगवान् श्रीकृष्णके नयनाभिराम मुखकमलका मकरन्द पान करते हुए अर्जुनके बाणोंसे बिंधकर प्राणत्याग किया, वे पवित्र होकर सब-के-सब भगवान्के परमधामको प्राप्त हो गये॥ २०॥✎ 19412971298
तथैव चान्ये नरलोकवीरा
य आहवे कृष्णमुखारविन्दम्।
नेत्रैः पिबन्तो नयनाभिरामं
पार्थास्त्रपूताः पदमापुरस्य॥ २०
शिशुपालके ही समान महाभारत-युद्धमें जिन दूसरे योद्धाओंने अपनी आँखोंसे भगवान् श्रीकृष्णके नयनाभिराम मुखकमलका मकरन्द पान करते हुए अर्जुनके बाणोंसे बिंधकर प्राणत्याग किया, वे पवित्र होकर सब-के-सब भगवान्के परमधामको प्राप्त हो गये॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 243) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/2/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#194 शब्दोंके बीचका स्थान: जाना—भगवान् की → जाना—भगवान्की
#1297 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रकुटिविलाससे → भु्रुकुटिविलाससे
#1298 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रुकुटिविलाससे → भ्रुकुटिविलाससे