श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

स उपव्रज्य वरदं प्रपन्‍नार्तिहरं हरिम्।

अनुग्रहाय भक्तानामनुरूपात्मदर्शनम्॥ २५

sa upavrajya varadaṃ prapannārtiharaṃ harim|

anugrahāya bhaktānāmanurūpātmadarśanam|| 25

अर्थ

तब उन्होंने भक्तोंपर कृपा करनेके लिये उनकी भावनाके अनुसार दर्शन देनेवाले, शरणागतवत्सल वरदायक श्रीहरिके पास जाकर कहा—॥ २५॥

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