श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.39

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

विससर्ज तनुं तां वै ज्योत्स्नां कान्तिमतीं प्रियाम्।

त एव चाददुः प्रीत्या विश्वावसुपुरोगमाः॥ ३९

visasarja tanuṃ tāṃ vai jyotsnāṃ kāntimatīṃ priyām|

ta eva cādaduḥ prītyā viśvāvasupurogamāḥ|| 39

अर्थ

उन्होंने ज्योत्स्ना (चन्द्रिका)-रूप अपने उस कान्तिमय प्रिय शरीरको त्याग दिया। उसीको विश्वावसु आदि गन्धर्वोंने प्रसन्‍नतापूर्वक ग्रहण किया ॥ ३९॥

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