सूतजी! उन दोनोंमें वार्तालाप होनेपर श्रीहरिके चरणोंसे सम्बन्ध रखनेवाली बड़ी पवित्र कथाएँ हुई होंगी, जो उन्हीं चरणोंसे निकले हुए गंगाजलके समान सम्पूर्ण पापोंका नाश करनेवाली होंगी॥ ५॥✎ 291
तयोः संवदतोः सूत प्रवृत्ता ह्यमलाः कथाः।
आपो गांगा इवाघघ्नीर्हरेः पादाम्बुजाश्रयाः॥ ५
सूतजी! उन दोनोंमें वार्तालाप होनेपर श्रीहरिके चरणोंसे सम्बन्ध रखनेवाली बड़ी पवित्र कथाएँ हुई होंगी, जो उन्हीं चरणोंसे निकले हुए गंगाजलके समान सम्पूर्ण पापोंका नाश करनेवाली होंगी॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 329) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/20/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)