मय्यात्मानं सह जगद् द्रक्ष्यस्यात्मनि चापि माम्॥ ३१
kṛtvā dayāṃ ca jīveṣu dattvā cābhayamātmavān|
mayyātmānaṃ saha jagad drakṣyasyātmani cāpi mām|| 31
अर्थ
जीवोंपर दया करते हुए तुम आत्मज्ञान प्राप्त करोगे और फिर सबको अभय-दान दे अपने सहित सम्पूर्ण जगत्को मुझमें और मुझको अपनेमें स्थित देखोगे॥ ३१॥
कृत्वा दयां च जीवेषु दत्त्वा चाभयमात्मवान्।
मय्यात्मानं सह जगद् द्रक्ष्यस्यात्मनि चापि माम्॥ ३१
जीवोंपर दया करते हुए तुम आत्मज्ञान प्राप्त करोगे और फिर सबको अभय-दान दे अपने सहित सम्पूर्ण जगत्को मुझमें और मुझको अपनेमें स्थित देखोगे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 338) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/21/31/