॥ श्रीहरिः ॥
सहाहं स्वांशकलया त्वद्वीर्येण महामुने।
तव क्षेत्रे देवहूत्यां प्रणेष्ये तत्त्वसंहिताम्॥ ३२
sahāhaṃ svāṃśakalayā tvadvīryeṇa mahāmune|
tava kṣetre devahūtyāṃ praṇeṣye tattvasaṃhitām|| 32
अर्थ
महामुने! मैं भी अपने अंश-कलारूपसे तुम्हारे वीर्यद्वारा तुम्हारी पत्नी देवहूतिके गर्भमें अवतीर्ण होकर सांख्यशास्त्रकी रचना करूँगा॥ ३२॥
सहाहं स्वांशकलया त्वद्वीर्येण महामुने।
तव क्षेत्रे देवहूत्यां प्रणेष्ये तत्त्वसंहिताम्॥ ३२
महामुने! मैं भी अपने अंश-कलारूपसे तुम्हारे वीर्यद्वारा तुम्हारी पत्नी देवहूतिके गर्भमें अवतीर्ण होकर सांख्यशास्त्रकी रचना करूँगा॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 338) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/21/32/