श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्यां स वै महायोगी युक्तायां योगलक्षणैः।

ससर्ज कतिधा वीर्यं तन्मे शुश्रूषवे वद॥ ४

tasyāṃ sa vai mahāyogī yuktāyāṃ yogalakṣaṇaiḥ|

sasarja katidhā vīryaṃ tanme śuśrūṣave vada|| 4

अर्थ

देवहूति योगके लक्षण यमादिसे सम्पन्‍न थी, उससे महायोगी कर्दमजीने कितनी सन्तानें उत्पन्‍न कीं? वह सब प्रसंग आप मुझे सुनाइये, मुझे उसके सुननेकी बड़ी इच्छा है॥ ४॥

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