yathā sasarja bhūtāni labdhvā bhāryāṃ ca mānavīm|| 5
अर्थ
इसी प्रकार भगवान् रुचि और ब्रह्माजीके पुत्र दक्षप्रजापतिने भी मनुजीकी कन्याओंका पाणिग्रहण करके उनसे किस प्रकार क्या-क्या सन्तान उत्पन्न की, यह सब चरित भी मुझे सुनाइये॥ ५॥
रुचिर्यो भगवान् ब्रह्मन्दक्षो वा ब्रह्मणः सुतः।
यथा ससर्ज भूतानि लब्ध्वा भार्यां च मानवीम्॥ ५
इसी प्रकार भगवान् रुचि और ब्रह्माजीके पुत्र दक्षप्रजापतिने भी मनुजीकी कन्याओंका पाणिग्रहण करके उनसे किस प्रकार क्या-क्या सन्तान उत्पन्न की, यह सब चरित भी मुझे सुनाइये॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 335) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/21/5/