॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.21.42
कदम्बचम्पकाशोककरंजबकुलासनैः ।
कुन्दमन्दारकुटजैश्चूतपोतैरलङ्कृतम् ॥ ४२
kadambacampakāśokakaraṃjabakulāsanaiḥ |
kundamandārakuṭajaiścūtapotairalaṅkṛtam || 42
अर्थ
वह आश्रम कदम्ब, चम्पक, अशोक, करंज, बकुल, असन, कुन्द, मन्दार, कुटज और नये-नये आमके वृक्षोंसे अलंकृत था॥ ४२॥