॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.21.43
कारण्डवैः प्लवैर्हंसैः कुररैर्जलकुक्कुटैः।
सारसैश्चक्रवाकैश्च चकोरैर्वल्गु कूजितम्॥ ४३
kāraṇḍavaiḥ plavairhaṃsaiḥ kurarairjalakukkuṭaiḥ|
sārasaiścakravākaiśca cakorairvalgu kūjitam|| 43
अर्थ
वहाँ जलकाग, बत्तख आदि जलपर तैरनेवाले पक्षी हंस, कुरर, जलमुर्ग, सारस, चकवा और चकोर मधुर स्वरसे कलरव कर रहे थे॥ ४३॥