॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.21.51
योऽर्केन्द्वग्नीन्द्रवायूनां यमधर्मप्रचेतसाम्।
रूपाणि स्थान आधत्से तस्मै शुक्लाय ते नमः॥ ५१
yo'rkendvagnīndravāyūnāṃ yamadharmapracetasām|
rūpāṇi sthāna ādhatse tasmai śuklāya te namaḥ|| 51
अर्थ
आप साक्षात् विशुद्ध विष्णुस्वरूप हैं तथा भिन्न-भिन्न कार्योंके लिये सूर्य, चन्द्र, अग्नि, इन्द्र, वायु, यम, धर्म और वरुण आदि रूप धारण करते हैं; आपको नमस्कार है॥ ५१॥