श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.50

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

नूनं चङ्‌क्रमणं देव सतां संरक्षणाय ते।

वधाय चासतां यस्त्वं हरेः शक्तिर्हि पालिनी॥ ५०

nūnaṃ caṅkramaṇaṃ deva satāṃ saṃrakṣaṇāya te|

vadhāya cāsatāṃ yastvaṃ hareḥ śaktirhi pālinī|| 50

अर्थ

‘देव! आप भगवान् विष्णुकी पालनशक्तिरूप हैं, इसलिये आपका घूमना-फिरना निःसन्देह सज्जनोंकी रक्षा और दुष्टोंके संहारके लिये ही होता है॥ ५०॥

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