जब मनुजी उनकी पूजा ग्रहण कर स्वस्थ-चित्तसे आसनपर बैठ गये, तब मुनिवर कर्दमने भगवान्की आज्ञाका स्मरण कर उन्हें मधुर वाणीसे प्रसन्न करते हुए इस प्रकार कहा—॥ ४९॥✎ 302
गृहीतार्हणमासीनं संयतं प्रीणयन्मुनिः।
स्मरन् भगवदादेशमित्याह श्लक्ष्णया गिरा॥ ४९
जब मनुजी उनकी पूजा ग्रहण कर स्वस्थ-चित्तसे आसनपर बैठ गये, तब मुनिवर कर्दमने भगवान्की आज्ञाका स्मरण कर उन्हें मधुर वाणीसे प्रसन्न करते हुए इस प्रकार कहा—॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 340) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/21/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)