श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

शारीरा मानसा दिव्या वैयासे ये च मानुषाः।

भौतिकाश्‍च कथं क्लेशा बाधन्ते हरिसंश्रयम्॥ ३७

śārīrā mānasā divyā vaiyāse ye ca mānuṣāḥ|

bhautikāśca kathaṃ kleśā bādhante harisaṃśrayam|| 37

अर्थ

व्यासनन्दन विदुरजी! जो पुरुष श्रीहरिके आश्रित रहता है उसे शारीरिक, मानसिक, दैविक, मानुषिक अथवा भौतिक दुःख किस प्रकार कष्ट पहुँचा सकते हैं॥ ३७॥

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