॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.23.13
सर्वकामदुघं दिव्यं सर्वरत्नसमन्वितम्।
सर्वर्द्ध्युपचयोदर्कं मणिस्तम्भैरुपस्कृतम्॥ १३
sarvakāmadughaṃ divyaṃ sarvaratnasamanvitam|
sarvarddhyupacayodarkaṃ maṇistambhairupaskṛtam|| 13
अर्थ
यह विमान सब प्रकारके इच्छित भोग-सुख प्रदान करनेवाला, अत्यन्त सुन्दर, सब प्रकारके रत्नोंसे युक्त, सब सम्पत्तियोंकी उत्तरोत्तर वृद्धिसे सम्पन्न तथा मणिमय खंभोंसे सुशोभित था॥ १३॥