श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.14

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

दिव्योपकरणोपेतं सर्वकालसुखावहम्।

पट्टिकाभिः पताकाभिर्विचित्राभिरलंकृतम्॥ १४

divyopakaraṇopetaṃ sarvakālasukhāvaham|

paṭṭikābhiḥ patākābhirvicitrābhiralaṃkṛtam|| 14

अर्थ

वह सभी ऋतुओंमें सुखदायक था और उसमें जहाँ-तहाँ सब प्रकारकी दिव्य सामग्रियाँ रखी हुई थीं तथा उसे चित्र-विचित्र रेशमी झंडियों और पताकाओंसे खूब सजाया गया था॥ १४॥

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