उसका मुख सुन्दर दन्तावली, मनोहर भौंहें, कमलकी कलीसे स्पर्धा करनेवाले प्रेमकटाक्षमय सुन्दर नेत्र और नीली अलकावलीसे बड़ा ही सुन्दर जान पड़ता है ॥ ३३॥
सुदता सुभ्रुवा श्लक्ष्णस्निग्धापांगेन चक्षुषा।
पद्मकोशस्पृधा नीलैरलकैश्च लसन्मुखम्॥ ३३
उसका मुख सुन्दर दन्तावली, मनोहर भौंहें, कमलकी कलीसे स्पर्धा करनेवाले प्रेमकटाक्षमय सुन्दर नेत्र और नीली अलकावलीसे बड़ा ही सुन्दर जान पड़ता है ॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 349) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/33/