॥ श्रीहरिः ॥
यदा सस्मार ऋषभमृषीणां दयितं पतिम्।
तत्र चास्ते सह स्त्रीभिर्यत्रास्ते स प्रजापतिः॥ ३४
yadā sasmāra ṛṣabhamṛṣīṇāṃ dayitaṃ patim|
tatra cāste saha strībhiryatrāste sa prajāpatiḥ|| 34
अर्थ
विदुरजी! जब देवहूतिने अपने प्रिय पतिदेवका स्मरण किया, तो अपनेको सहेलियोंके सहित वहीं पाया जहाँ प्रजापति कर्दमजी विराजमान थे॥ ३४॥
यदा सस्मार ऋषभमृषीणां दयितं पतिम्।
तत्र चास्ते सह स्त्रीभिर्यत्रास्ते स प्रजापतिः॥ ३४
विदुरजी! जब देवहूतिने अपने प्रिय पतिदेवका स्मरण किया, तो अपनेको सहेलियोंके सहित वहीं पाया जहाँ प्रजापति कर्दमजी विराजमान थे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 349) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/34/