इस प्रकार उस कामासक्त दम्पतिको अपने योगबलसे सैकड़ों वर्षोंतक विहार करते हुए भी वह काल बहुत थोड़े समयके समान निकल गया॥ ४६॥
एवं योगानुभावेन दम्पत्यो रममाणयोः।
शतं व्यतीयुः शरदः कामलालसयोर्मनाक्॥ ४६
इस प्रकार उस कामासक्त दम्पतिको अपने योगबलसे सैकड़ों वर्षोंतक विहार करते हुए भी वह काल बहुत थोड़े समयके समान निकल गया॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 350) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/23/46/