॥ श्रीहरिः ॥
एतावतालं कालेन व्यतिक्रान्तेन मे प्रभो।
इन्द्रियार्थप्रसंगेन परित्यक्तपरात्मनः॥ ५३
etāvatālaṃ kālena vyatikrāntena me prabho|
indriyārthaprasaṃgena parityaktaparātmanaḥ|| 53
अर्थ
प्रभो! अबतक परमात्मासे विमुख रहकर मेरा जो समय इन्द्रियसुख भोगनेमें बीता है, वह तो निरर्थक ही गया॥ ५३॥
एतावतालं कालेन व्यतिक्रान्तेन मे प्रभो।
इन्द्रियार्थप्रसंगेन परित्यक्तपरात्मनः॥ ५३
प्रभो! अबतक परमात्मासे विमुख रहकर मेरा जो समय इन्द्रियसुख भोगनेमें बीता है, वह तो निरर्थक ही गया॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 351) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/23/53/