श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.53

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

एतावतालं कालेन व्यतिक्रान्तेन मे प्रभो।

इन्द्रियार्थप्रसंगेन परित्यक्तपरात्मनः॥ ५३

etāvatālaṃ kālena vyatikrāntena me prabho|

indriyārthaprasaṃgena parityaktaparātmanaḥ|| 53

अर्थ

प्रभो! अबतक परमात्मासे विमुख रहकर मेरा जो समय इन्द्रियसुख भोगनेमें बीता है, वह तो निरर्थक ही गया॥ ५३॥

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