श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

वेदाहमाद्यं पुरुषमवतीर्णं स्वमायया।

भूतानां शेवधिं देहं बिभ्राणं कपिलं मुने॥ १६

vedāhamādyaṃ puruṣamavatīrṇaṃ svamāyayā|

bhūtānāṃ śevadhiṃ dehaṃ bibhrāṇaṃ kapilaṃ mune|| 16

अर्थ

मुने! मैं जानता हूँ, जो सम्पूर्ण प्राणियोंकी निधि हैं—उनके अभीष्ट मनोरथ पूर्ण करनेवाले हैं, वे आदिपुरुष श्रीनारायण ही अपनी योगमायासे कपिलके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ १६॥✎ 309 1596

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #309 शब्दोंके बीचका स्थान: बाल,कमल-जैसे → बाल, कमल-जैसे
  • #1596 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: निष्कपट-भावसे → निष्कपटभावसे

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