मुने! मैं जानता हूँ, जो सम्पूर्ण प्राणियोंकी निधि हैं—उनके अभीष्ट मनोरथ पूर्ण करनेवाले हैं, वे आदिपुरुष श्रीनारायण ही अपनी योगमायासे कपिलके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ १६॥✎ 3091596
वेदाहमाद्यं पुरुषमवतीर्णं स्वमायया।
भूतानां शेवधिं देहं बिभ्राणं कपिलं मुने॥ १६
मुने! मैं जानता हूँ, जो सम्पूर्ण प्राणियोंकी निधि हैं—उनके अभीष्ट मनोरथ पूर्ण करनेवाले हैं, वे आदिपुरुष श्रीनारायण ही अपनी योगमायासे कपिलके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 353) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/24/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)