माता देवहूतिको भी मैं सम्पूर्ण कर्मोंसे छुड़ानेवाला आत्मज्ञान प्रदान करूँगा जिससे यह संसाररूप भयसे पार हो जायगी॥ ४०॥
मात्र आध्यात्मिकीं विद्यां शमनीं सर्वकर्मणाम्।
वितरिष्ये यया चासौ भयं चातितरिष्यति॥ ४०
माता देवहूतिको भी मैं सम्पूर्ण कर्मोंसे छुड़ानेवाला आत्मज्ञान प्रदान करूँगा जिससे यह संसाररूप भयसे पार हो जायगी॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 356) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/24/40/