श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.41

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

एवं समुदितस्तेन कपिलेन प्रजापतिः।

दक्षिणीकृत्य तं प्रीतो वनमेव जगाम ह॥ ४१

evaṃ samuditastena kapilena prajāpatiḥ|

dakṣiṇīkṛtya taṃ prīto vanameva jagāma ha|| 41

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवान् कपिलके इस प्रकार कहनेपर प्रजापति कर्दमजी उनकी परिक्रमा कर प्रसन्‍नतापूर्वक वनको चले गये॥ ४१॥✎ 311

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #311 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् की → श्रीभगवान्‌की

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें