सम्पूर्ण भूतोंमें अपने आत्मा श्रीभगवान्को और सम्पूर्ण भूतोंको आत्मस्वरूप श्रीहरिमें स्थित देखने लगे॥ ४६॥✎ 312
आत्मानं सर्वभूतेषु भगवन्तमवस्थितम्।
अपश्यत्सर्वभूतानि भगवत्यपि चात्मनि॥ ४६
सम्पूर्ण भूतोंमें अपने आत्मा श्रीभगवान्को और सम्पूर्ण भूतोंको आत्मस्वरूप श्रीहरिमें स्थित देखने लगे॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 356) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/24/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#312 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् को → श्रीभगवान्को