श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.25.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

न युज्यमानया भक्‍त्या भगवत्यखिलात्मनि।

सदृशोऽस्ति शिवः पन्था योगिनां ब्रह्मसिद्धये॥ १९

na yujyamānayā bhaktyā bhagavatyakhilātmani|

sadṛśo'sti śivaḥ panthā yogināṃ brahmasiddhaye|| 19

अर्थ

योगियोंके लिये भगवत्प्राप्तिके निमित्त सर्वात्मा श्रीहरिके प्रति की हुई भक्तिके समान और कोई मंगलमय मार्ग नहीं है॥ १९॥

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