श्रीभगवान्ने कहा—माताजी! अब मैं तुम्हें प्रकृति आदि सब तत्त्वोंके अलग-अलग लक्षण बतलाता हूँ; इन्हें जानकर मनुष्य प्रकृतिके गुणोंसे मुक्त हो जाता है॥ १॥✎ 317
अथ ते सम्प्रवक्ष्यामि तत्त्वानां लक्षणं पृथक्।
यद्विदित्वा विमुच्येत पुरुषः प्राकृतैर्गुणैः॥ १
श्रीभगवान्ने कहा—माताजी! अब मैं तुम्हें प्रकृति आदि सब तत्त्वोंके अलग-अलग लक्षण बतलाता हूँ; इन्हें जानकर मनुष्य प्रकृतिके गुणोंसे मुक्त हो जाता है॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 362) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#317 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने