ओषधियोंने रोमोंके सहित त्वचामें प्रवेश किया फिर भी विराट् पुरुष न उठा। जलने वीर्यके साथ लिंगमें प्रवेश किया, तब भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६५॥
त्वचं रोमभिरोषध्यो नोदतिष्ठत्तदा विराट्।
रेतसा शिश्नमापस्तु नोदतिष्ठत्तदा विराट्॥ ६५
ओषधियोंने रोमोंके सहित त्वचामें प्रवेश किया फिर भी विराट् पुरुष न उठा। जलने वीर्यके साथ लिंगमें प्रवेश किया, तब भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 369) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/65/