माताजी! इन सब बातोंका मनन करके विवेकी पुरुष अपने आत्माका अनुभव कर लेता है, जो अहंकारके सहित सम्पूर्ण तत्त्वोंका अधिष्ठान और प्रकाशक है॥ १६॥
एवं प्रत्यवमृश्यासावात्मानं प्रतिपद्यते।
साहङ्कारस्य द्रव्यस्य योऽवस्थानमनुग्रहः॥ १६
माताजी! इन सब बातोंका मनन करके विवेकी पुरुष अपने आत्माका अनुभव कर लेता है, जो अहंकारके सहित सम्पूर्ण तत्त्वोंका अधिष्ठान और प्रकाशक है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.27.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 371) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/27/16/