श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.27.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

एवं प्रत्यवमृश्यासावात्मानं प्रतिपद्यते।

साहङ्कारस्य द्रव्यस्य योऽवस्थानमनुग्रहः॥ १६

evaṃ pratyavamṛśyāsāvātmānaṃ pratipadyate|

sāhaṅkārasya dravyasya yo'vasthānamanugrahaḥ|| 16

अर्थ

माताजी! इन सब बातोंका मनन करके विवेकी पुरुष अपने आत्माका अनुभव कर लेता है, जो अहंकारके सहित सम्पूर्ण तत्त्वोंका अधिष्ठान और प्रकाशक है॥ १६॥

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