श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.22

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

यो मां सर्वेषु भूतेषु सन्तमात्मानमीश्‍वरम्।

हित्वार्चां भजते मौढ्याद्भस्मन्येव जुहोति सः॥ २२

yo māṃ sarveṣu bhūteṣu santamātmānamīśvaram|

hitvārcāṃ bhajate mauḍhyādbhasmanyeva juhoti saḥ|| 22

अर्थ

मैं सबका आत्मा, परमेश्‍वर सभी भूतोंमें स्थित हूँ; ऐसी दशामें जो मोहवश मेरी उपेक्षा करके केवल प्रतिमाके पूजनमें ही लगा रहता है, वह तो मानो भस्ममें ही हवन करता है॥ २२॥

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