अतः यह मानकर कि जीवरूप अपने अंशसे साक्षात् भगवान् ही सबमें अनुगत हैं, इन समस्त प्राणियोंको बड़े आदरके साथ मनसे प्रणाम करे॥ ३४॥
मनसैतानि भूतानि प्रणमेद्बहु मानयन्।
ईश्वरो जीवकलया प्रविष्टो भगवानिति॥ ३४
अतः यह मानकर कि जीवरूप अपने अंशसे साक्षात् भगवान् ही सबमें अनुगत हैं, इन समस्त प्राणियोंको बड़े आदरके साथ मनसे प्रणाम करे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.29.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 383) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/29/34/