श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.41

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

यद्वनस्पतयो भीता लताश्चौषधिभिः सह।

स्वे स्वे कालेऽभिगृह्णन्ति पुष्पाणि च फलानि च॥ ४१

yadvanaspatayo bhītā latāścauṣadhibhiḥ saha|

sve sve kāle'bhigṛhṇanti puṣpāṇi ca phalāni ca|| 41

अर्थ

इसीसे भयभीत होकर ओषधियोंके सहित लताएँ और सारी वनस्पतियाँ समय-समयपर फल-फूल धारण करती हैं॥ ४१॥

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