अपने इस शरीरको यहीं छोड़कर प्राणियोंसे द्रोह करके एकत्रित किये हुए पापरूप पाथेयको साथ लेकर वह अकेला ही नरकमें जाता है॥ ३१॥
एकः प्रपद्यते ध्वान्तं हित्वेदं स्वकलेवरम्।
कुशलेतरपाथेयो भूतद्रोहेण यद् भृतम्॥ ३१
अपने इस शरीरको यहीं छोड़कर प्राणियोंसे द्रोह करके एकत्रित किये हुए पापरूप पाथेयको साथ लेकर वह अकेला ही नरकमें जाता है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.30.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 388) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/30/31/