श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

दैवेनासादितं तस्य शमलं निरये पुमान्।

भुङ्क्ते कुटुम्बपोषस्य हृतवित्त इवातुरः॥ ३२

daivenāsāditaṃ tasya śamalaṃ niraye pumān|

bhuṅkte kuṭumbapoṣasya hṛtavitta ivāturaḥ|| 32

अर्थ

मनुष्य अपने कुटुम्बका पेट पालनेमें जो अन्याय करता है, उसका दैवविहित कुफल वह नरकमें जाकर भोगता है। उस समय वह ऐसा व्याकुल होता है, मानो उसका सर्वस्व लुट गया हो॥ ३२॥

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