daśāhena tu karkandhūḥ peśyaṇḍaṃ vā tataḥ param|| 2
अर्थ
वहाँ वह एक रात्रिमें स्त्रीके रजमें मिलकर एकरूप कलल बन जाता है, पाँच रात्रिमें बुद्बुदरूप हो जाता है, दस दिनमें बेरके समान कुछ कठिन हो जाता है और उसके बाद मांसपेशी अथवा अण्डज प्राणियोंमें अण्डेके रूपमें परिणत हो जाता है॥ २॥✎ 339
कललं त्वेकरात्रेण पञ्चरात्रेण बुद्बुदम्।
दशाहेन तु कर्कन्धूः पेश्यण्डं वा ततः परम्॥ २
वहाँ वह एक रात्रिमें स्त्रीके रजमें मिलकर एकरूप कलल बन जाता है, पाँच रात्रिमें बुद्बुदरूप हो जाता है, दस दिनमें बेरके समान कुछ कठिन हो जाता है और उसके बाद मांसपेशी अथवा अण्डज प्राणियोंमें अण्डेके रूपमें परिणत हो जाता है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.31.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 389) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/31/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)